कुछ अलग शौक पाल रखे हैं मैंने,

नींदें काटकर सपने बुनता हूँ|



पढ़ने गये कविता हम शेर-ओ-शायरी के दौर में,

मेरी पंक्तियाँ कुचल गयीं, वाहवाही के शोर में|

#ShubhankarThinks