नयी बुनियाद में जरूरत थी थोड़ी 

पानी की तराई की,

साजिशन यह काम एक फ़रेबी कारीगर ने लिया!

फिर रोज़ पानी की अतिशयोक्ति की गयी,

और ढहा दी गयी वो कच्ची नींव 

पर टिकी बुलंद दीवार|