निकले थे हम भी अकेले ही राहों में,

जुनून जोश लिए मन में|

फिर कभी उसूलों की रुकावट हुई तो 

कहीं तज़ुर्बे ने कुछ राहों पर आगे बढ़ने से रोका|

अब देख लो खुद को जमाने की रफ्तार में 

खुद को थोड़ा पीछे पाता हूँ|