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जिस्मानी मोहब्बत !Erotica

Declaimer- Strictly 18+ content, read at your own risk. रूह की मौजूदगी क्या कर पायेगी, जिस्मों की सनसनी जब महफ़िल जमायेगी। हैं तैयार दो बदन रुख़सत की शिरकत में, हवस तौर से उतरेगी मोहब्बत की कसरत में। गुनाह माफ़ कर देना अब इनसे तौबा ना होगी, जिस्मानी हसरतें अब हौव्वा ना होगी। लगाकर जाम होठों पर, शौक से मयकशी होगी, फ़ेंक कर लिबास कोने में खूब बेकदरी होगी। जिस्म ऐसे चिपक जाए, जैसे गोंद से जोड़ दिए हों, बदन ऐसे…

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​चैन और सुकून से भरा था मुहल्ला, आवामएहिन्द बडी मौज में रहती थी| महफिलएशायरी करते थे लोग वहां, मुशायरे में होती थीं रौनकें जहां की! कोई शमा मुजलिस में मशगूल होती थी| मुफलिसी में रहते थे वो फकीर वहां के, मगर उनकी बातों में भी अमीरी सी होती थी| हुस्नएअदा थी तहजीब में उनके, तालीम की पहचान भी अदब बातों से होती थी | एक बाज की नजरएबाद थी  बस्ती पर , उसे आवाम के चैन अमन से तकलीफ सी…