Tag: thought of the day in hindi

फ़िज़ा बिगड़ गयी है

दंगे फसादों का दामन नहीं छूट रहा, फ़िज़ाएँ बिगड़ गयी हैं मेरे देश में! तिरंगा फहराने पर भी मार काट होती है, शायद बहरूपिये रहने लगे हैं अब इंसानों के भेष में|

मैंने हकीकत देखी है

आज मैंने एक हक़ीक़त देखी, इंसान की गंदी सोच की हिमाकत देखी! कितने लोगों की नसीहत देखीं, नसीहत के पीछे सियासत देखी| ख़ुद चाहे दुनिया घूम आयें, बहन को घर में जकड़ने की हिमाकत देखी| मैंने झूठे लोगों को रोना रोते हुए, कुछ सच्चे लोगों की झूठी मुस्कुराहट देखी| कोई ख्वाब नहीं था वो, हक़ीक़त ही थी| हाँ मैंने कुछ कड़वी हक़ीक़त देखी|

अकेले बढ़ोगे तो क्या बात होगी

राह में पैर फिसल गया तो क्या हुआ? अगर एक बार बिना सहारे के उठा तो क्या बात होगी| राह-ए- मंज़िल नहीं है आसान तो क्या हुआ? अगर एक बार आगे निकल गया तो फिर क्या बात होगी| रोड़े पड़े हैं राहों में तेरे तो क्या हुआ? गिर गिर के हर बार उठा तो फिर क्या बात होगी| हौसले टूटते हैं कठिनाइयों में तो क्या हुआ? अगर एक बार फिर से तूने हिम्मत जुटा ली तो क्या बात होगी| नाकाम…