Tag: poetry

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…

प्रेम और हिमपात

आज वातावरण में मिठास सी है, शीत पवन में भी तेरी सुगंध घुली है! मेरे प्रेम की लहरें और भी तीव्र हो उठी हैं, हिमपात की कठिन परिस्थिति में, प्रत्येक शीत अनुभव मुझे, तुम्हारे श्वांस से निकले उष्ण वायु के सुखद अनुभव की याद दिलाता है| तुम पता नहीं कहाँ हो? लगातार ये शीत वायु मुझे स्पर्श करके, तुम्हारे प्रेम की महत्ता का ज्ञान करा रही है| Pic Credit- Google नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग, यह कविता मूल रूप…

वो लड़की 

वो लाड़ली है अपने माँ बाप की , मगर भाई की स्वतंत्रता के आगे , माँ- बाप की ममता उसके लिए फीकी पड़ जाती है! वो जिद्दी है बचपन से ही मगर पराये घर में वो दूसरों को मनाती है, उसे पसंद है, मनमानी करना मगर अब वो दूसरों के मन की बातों को निभाती है| उसकी आदत है, अपने निर्णय स्वयं लेने की मगर अब वो किसी दूसरों के आदेशों को सिर-माथे बिठाती है| कुछ गुण है उसमें औरों…

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार, ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार! निराशाओं से भ्रमित विचार, जैसे रुक गया हो ये संसार||   मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग , कर रहा अलग ही भागम भाग! गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की, दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|   ये परिणाम है सब असफलता का, सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का ! यह बात नहीं अब कोई विशेष है, समर अभी शेष है|   परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों…

घरौंदा

मेरे घर के आँगन में एक बड़ा सा पेड़ है बरगद का, जानवरों को धूप से बचाता है , हम सबको ठंडी छाँव देता है ! इन सबके साथ साथ वो आशियाना है उस नए प्राणी का|   जो अभी बसंत गुजर जाने के बाद यहाँ नई आकर बसी है, वो रहती है, उस बड़े से तने में बने ख़ुफ़िया से खोखले में, जो पिछले २-३ महीने से शैतान गिलहरियों की कारिस्तानी की वजह से बना था !   ये कोई…

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता – ख़बर ना तुझे रही अब , ना मुझे कोई ख़बर है! तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब हाल चाल मेरा, तो अपनी तरफ से बताना , मैं अब वाजिब नहीं समझता ! शायद दूरियां पसंद हैं तुझको, कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही…

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर , छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा ! ना होश है उन्हें अपनों का ,  ना रहा कोई तेरा मेरा | किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ? “क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?” मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले  “ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !” बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर…

सपने क्या होते हैं?

​सपने क्या होते हैं? अगर शाम ढले बेफ़िक्र होकर , लजीज़ खाना खाकर, पंखा कूलर या फिर ऐसी की ठंडी हवा में , मख़मली से आराम गद्दों पर, बड़े चैन की नींद सो जाते हो आप! तो क्या खाक सपने देखोगे आप? सपने वो होते हैं जो रातों की नींदें उड़ा दें, चैन सुकून को तुम्हारा दुश्मन बता दें, और इस शांत से दिमाग में कोलाहल मचा दें| सपने वो नहीं जिन्हें सुबह आंखें खुलते ही भूल जाओ, सपने वो…

शहरी गर्मी

​ये कविता उस स्थिति के बारे में लिखी गयी है| जब किसी नौकरी की तलाश में कोई बेरोजगार नौजवान युवा गांव से शहर का रुख करता है तो गर्मी में उसका हाल कुछ ऐसा हो जाता है- IMG credit- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A_view_of_Road_Traffic_Chandagaur_to_New_Delhi_India_Highways.jpg गर्म मौसम और शहर का तापमान स्तर, यहां होता है माहौल औरों से इतर! लू के थपेड़ों से जलता बदन, काल के गाल में समा जाती है वो मदमस्त पवन ! वो सड़कों से उड़ती तेज  धूल , जैसे कोई चुभा…