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उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…

आज का विचार

मनुष्य की एक प्रवत्ति होती है की वो हमेशा उन लोगों का ध्यान आकृष्ट करने की जुगत में लगा रहता है, जो उस पर ध्यान नहीं देते| इन सबके बीच वो उन सभी लोगो की अनदेखी कर देता है ,जो उस पर ध्यान देते हैं|