Tag: confused thoughts

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…

घरौंदा

मेरे घर के आँगन में एक बड़ा सा पेड़ है बरगद का, जानवरों को धूप से बचाता है , हम सबको ठंडी छाँव देता है ! इन सबके साथ साथ वो आशियाना है उस नए प्राणी का|   जो अभी बसंत गुजर जाने के बाद यहाँ नई आकर बसी है, वो रहती है, उस बड़े से तने में बने ख़ुफ़िया से खोखले में, जो पिछले २-३ महीने से शैतान गिलहरियों की कारिस्तानी की वजह से बना था !   ये कोई…

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता – ख़बर ना तुझे रही अब , ना मुझे कोई ख़बर है! तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब हाल चाल मेरा, तो अपनी तरफ से बताना , मैं अब वाजिब नहीं समझता ! शायद दूरियां पसंद हैं तुझको, कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही…

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से, सेना हटती नहीं हमारी! अरि दल की  साजिशों से , गति रुकती नहीं हमारी! अवशेष ,संस्कृति से , दृष्टि हटती नहीं हमारी ! अपवाद बंदिशों से , छवि डिगती नहीं हमारी ! कुछ खास है हममें , की हस्ती मिटती नहीं हमारी ! सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा || आदर्श देख इसके  लोग सुदूर से आते हैं , विचार देख इसके, चकित रह जाते हैं! सत्कार देख यहां का, वो यहीं  बस जाते हैं !…

बदलते भारत की तस्वीर

नमस्कार दोस्तो, काफी दिनों बाद आपसे कुछ बात करने का मन हुआ है , हमेशा कविताएं लिखता हूँ , मगर कुछ बातें सीधे आप सबके समक्ष रख सकूँ इसलिए आज कोई कविता नहीं लिखूंगा ! जैसा कि आपने शीर्षक पढ़ा होगा तो आपमें से बहुत लोगों को लग रहा होगा कि मैं  भी मोदी जी के तीन साल के काम गिनाने जा रहा हूँ |नहीं ऐसा कुछ नहीं है! अगर अपने देश के विकास की बात करनी होती तो मैं…

अंत्येष्टि 

ढोल नगाडों से स्वागत हुआ था , मीठे भोगों से आवाभगत किया था! मां ने  सारा सुख परित्याग किया था, जब उस नन्हे से जीव ने जन्म लिया था || फिर गली मौहल्ले  नापकर चला वो , उठता सम्हलता कभी दौडता चला वो ! कभी सुख  तो कभी दुख में चला वो , जिन्दगी के पथ पर बढता चला वो ! कंधों पर लिए जिम्मेदारी का बोझा , अपने जीवन की गाडी को हांकता चला वो|| कभी बारिश में भीगा…

रिश्तों का दायरा (Scope of relationships)

नमस्कार दोस्तो hello guys  वो कहते हैं ना इन्सान कितनी भी भाषाओं में लिख,बोल व सुन सकता है मगर सोचता अपनी मातृभाषा में ही है| (सबकी बात नहीं कर रहा सिर्फ अपने विचार रख रहा हूं 😁) आज मैं सीधे मुद्दे पर आता हूं , जैसा कि मेरा आज का शीर्षक है रिश्तों का दायरा जैसा कि आप सब अच्छी तरह जानते हैं! रिश्तों का कोई दायरा नहीं होता , चाहे वो बाप बेटे का रिश्ता हो ,चाहे भाई भाई…

रंग_ए_चमन-1

​चैन और सुकून से भरा था मुहल्ला, आवामएहिन्द बडी मौज में रहती थी| महफिलएशायरी करते थे लोग वहां, मुशायरे में होती थीं रौनकें जहां की! कोई शमा मुजलिस में मशगूल होती थी| मुफलिसी में रहते थे वो फकीर वहां के, मगर उनकी बातों में भी अमीरी सी होती थी| हुस्नएअदा थी तहजीब में उनके, तालीम की पहचान भी अदब बातों से होती थी | एक बाज की नजरएबाद थी  बस्ती पर , उसे आवाम के चैन अमन से तकलीफ सी…