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कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं , वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं ! बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है , अब देखो! मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए ! कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में , आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए | कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,…

One-sided lens of my Spectacles

Hello every one, I hope you all are doing well, today am going to share my problem, I am facing a problem of myopia since last few years. If you are not aware with this word, then I would like to tell you that Blurry vision in one eye or both eyes may be a symptom of myopia. I went to doctors and they fully checked up my eyes with scanner and they found everything okay also they recommended me…

लिबास 

Img credit- http://im.rediff.com/money/2013/nov/01india1.jpg ​तन ढ़कने के लिए या फिर लाज हया के लिए किसी कारीगर ने ये लिबास, शाम ढ़लते बाजारों में बनावटी चकाचौंध में दुकानों पर सजे हैं ढ़ेरों लिबास ! कुछ कौड़ियों में बिक रहे हैं  बड़े कीमती हैं कुछ लिबास, कुछ सूती, कुछ मख़मली तो कुछ रेशमी धागों से बने हैं ये सब लिबास ! खैर ये नहीं थी कोई बात खास| आज बात होगी नज़र – ऐ-जहाँ  की , इंसान के गुस्ताख़ आलम और बनावटी समां की…

शहरी गर्मी

​ये कविता उस स्थिति के बारे में लिखी गयी है| जब किसी नौकरी की तलाश में कोई बेरोजगार नौजवान युवा गांव से शहर का रुख करता है तो गर्मी में उसका हाल कुछ ऐसा हो जाता है- IMG credit- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A_view_of_Road_Traffic_Chandagaur_to_New_Delhi_India_Highways.jpg गर्म मौसम और शहर का तापमान स्तर, यहां होता है माहौल औरों से इतर! लू के थपेड़ों से जलता बदन, काल के गाल में समा जाती है वो मदमस्त पवन ! वो सड़कों से उड़ती तेज  धूल , जैसे कोई चुभा…

ऑनर किलिंग!

​ऑनर किलिंग की घटनाएं हमारे देश में आये दिन होती रहती हैं, जिसके बाद के दृश्य को मैंने अपनी कविता के माध्यम से प्रदर्शित किया है| यह कविता लड़की के बाप के ऊपर आधारित है ,जिसमें लड़की का बाप अपनी बेटी सहित उस लड़के की हत्या कर देता है | आरोप सिद्ध होने के बाद उसे जेल होते है और घर वापस आकर कुछ इस तरह से व्यथित होता है – होती अगर जीवित वो आज, तो आँगन में मेरे…

बदलते भारत की तस्वीर

नमस्कार दोस्तो, काफी दिनों बाद आपसे कुछ बात करने का मन हुआ है , हमेशा कविताएं लिखता हूँ , मगर कुछ बातें सीधे आप सबके समक्ष रख सकूँ इसलिए आज कोई कविता नहीं लिखूंगा ! जैसा कि आपने शीर्षक पढ़ा होगा तो आपमें से बहुत लोगों को लग रहा होगा कि मैं  भी मोदी जी के तीन साल के काम गिनाने जा रहा हूँ |नहीं ऐसा कुछ नहीं है! अगर अपने देश के विकास की बात करनी होती तो मैं…

मेरी माँ

जन्म वगरह का तो कुछ याद नहीं कुछ , आपने भी बाकी सबकी तरह मेरे लिए दर्द सहा होगा ! हाँ उन दिनों को याद करके, मुझे आज भी हंसी आती है! जब मुझे जबरदस्ती पकड़कर दाल पिलाई जाती थी | जो मुझे तब बिल्कुल पसंद नहीं थी | शब्द ज्ञान , मात्रा , लेख सब कुछ सिखाया था, अगर गलती करो तो डाँट भी लगाई जाती थी ! और जब मेरा दाखिला हुआ तो रोज शाम को स्कूल से…

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए – IMG source – http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg प्रेमी  अपनी प्रेमिका से – प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी! तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया…

प्रेम पत्र-1

 एक प्रेमिका का प्रेमी  को    पत्र-   एक प्रेमी युगल उच्च शिक्षा के लिए एक दूसरे से बिछड़ जाता है ! प्रेमिका ने पास के ही एक कॉलेज में BA  में दाखिला लिया है और प्रेमी को दूसरे शहर इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि पास के कॉलेज में B.Sc Mathmetics नहीं थी |अब दोनों को गए आधा वर्ष बीत गया इस बीच दोनों की ना कोई बात हुई ,ना कोई मिलाप हुआ ! आखिर होता भी कैसे उस जमाने में…

हिंसक-अहिंसा

अभी जैसा आप सबको पता है देश में एक गंभीर समस्या चल रही है , उस समस्या का अभी तक कोई समाधान नही मिल पा रहा रोज हम अखबारों में सैनिकों के शहीद होने की खबर पढ़ते हैं ऐसी खबर पढ़कर मेरे अंदर बहुत उथल पुथल होती है समझ नहीं आ रहा आखिर ये रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा उसी व्यथा को मैंने कुछ शब्दों के माध्यम से लिखा है शायद कुछ लोगों को आपत्ति भी हो मेरे…