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अंतिम दृश्य   भाग-७

प्रतिदिन की भांति आज भी शक्तिप्रसाद सुबह भोर में उठकर नहा धोकर गांव के बाहर वाले शिव मंदिर पर पूजा करने गए थे , अब उन्हें ये कहाँ पता था आज होनी को कुछ और मंजूर है ,जैसे ही घर वापस आये हर रोज की भांति उन्हें लगा मधुमति चूल्हे पर चाय वगरह बना रही होगी मगर आज दृश्य पूर्णतयः परिवर्तित था , बाहर बरामद एकदम शान्त था और आज कोई बर्तन की आवाज भी नहीं आ रही थी !…

कल्पना 

​*कल्पना कविता का अभिप्राय उस अनुपमा कन्या की छवि से है जो किसी नवयुवक के स्वप्नों में निर्मित हुई है  तुम्हारे बारे में क्या कहूं  शायद तुम कोई सौन्दर्य रस की कविता हो , जिसमें समस्त उपमायें सम्मिलित हैं ! नहीं तुम उन सभी दीपों का प्रकाश हो , जो मेरे ह्रदय रूपी आंगन में प्रज्वल्लित हैं ! या फिर तुम लेखनी हो किसी प्रेम ग्रन्थ की , जो पूर्णतयः हस्तलिखित है ! तुम जरूर पुष्पमाला हो उस प्रेम मन्दिर…

स्वाभिमान 

ख्वाबों में आकर दुनिया सजाती थी  मुझे पता था वो सब वहम था मेरा मगर तू भी मुझे कुछ कम नहीं उकसाती थी खैर मैंने अब तुझे भुला दिया तेरा नाम पता सब मिटा दिया आखिर स्वाभिमान भी अहम था मेरा ! कोशिश तो की थी मैंने भी   भरपूर मगर हर   बार  उसे नाकाम बनाना रहम था तेरा क्या पता मैं ही गलत था ? क्या पता मेरा सब कुछ एकतरफा था ? अगर ये सब सच है…

SELFISH OR SELF CARE -2

PREVIOUSLY ROHAN GOT texts from a unknown number he was so excited, now next_ As we know Rohan love to keep himself alone, that’s who don’t behave like other those who share their all naughty chat conversation with friends so this time he keep same. Sometimes Rohan talk to himself beacuase no one cant make control over  the thoughts. His first thought tells him “Rohan may be there will be a relative” but he reply to thought “But I have…

Completed 200* followers

Hello guys  I know you all are amazing , you are doing great yaar  I am your biggest fan , love the way you do support with your warm comments , Your comments work like fuel which push me to write more and more  I hope you will be continue , again I would like to say please do comment ,don’t care you are criticising or appreciating me cz I need both . I can’t list out all readers but…

अंतिम दृश्य -६ 

दुःख और सुख दोनों एक दूसरे के संगी हैं , सुख आता है तो इसके पीछे पीछे दुःख भी चला आता है ! खैर बेटा बहु को शहर गये पूरा एक वर्ष व्यतीत हो गया है इस बीच दीपावली पर सभी लोग इकठठे हुए थे मधुमती का वश चलता तो दीपावली के त्यौहार को रमजान के सरीखा एक महीने लम्बा खींच देतीं मगर ये उसके नियंत्रण से बाहर की बात है आखिर उसका वश तो खुद के परिवार पर भी…

Three faces of society 

Hello guys hope you all are doing well  I am sorry I am too busy now days so both story series are getting late but today topic is different :-  Actually I always saw the different blogs about social issues also I anylize them today I would like to give my opinion which comes after a case study , I don’t know I am describing it in right manner or just throwing useless content . Now let’s start  First of…

अन्तिम दृश्य भाग-५

आप कृपया कमरा खाली कर दीजिए ,मुझे सफाई.करनी. है ” ये भावुक आवाज थी हास्पिटल के सफाई कर्मी की.,.उसने ये बात बहुत संकोचवश बोली थी मानो अन्दर से हृदय उसे ये करने के लिये मना कर रहा हो वो कहते हैं ना “गन्दा है मगर धंधा है “! सभी को बाहर निकलवाना मजबूरी है उसकी वरना अपनों को ऐसी स्थिति में एक पल भी दूर करने का दर्द उसे अच्छे से पता है ! खैर सुधीर बाहर टहलने चला गया…

Selfish or self care

(hello guys , how are you all? As you know I started my Hindi story but unfortunately I could not justice to story as per your reactions because when I started people have lot of views but after 2,3 part , you people just did  the favour to me by  your likes :)m sorry but I can’t stop my words so today again I am going to start a story so please give me a chance and pay your attention…

अन्तिम दृश्य – भाग -४ 

इस बार चित्रण थोड़ा आगे निकल चुका था। मानो जितने समय सुधीर व्यस्त हुआ उस वक्त का सारा अध्याय निकलकर आगे पहुंच गया हो… “भैया वो बात ये है कि मैं इस लडकी से शादी नहीं कर सकता!” – विनोद ने संकोचवश बड़ी धीमी आवाज में बड़े भाई से फुसफुसाते हुए कहा। इतना सुनते ही सुधीर के पैरों तले जमीन खिसक गयी आखिर बात ही ऐसी बोली थी। हुआ ये था कि सुधीर अब २३ वर्ष का हो गया था…