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अंतिम दृश्य -६ 

दुःख और सुख दोनों एक दूसरे के संगी हैं , सुख आता है तो इसके पीछे पीछे दुःख भी चला आता है ! खैर बेटा बहु को शहर गये पूरा एक वर्ष व्यतीत हो गया है इस बीच दीपावली पर सभी लोग इकठठे हुए थे मधुमती का वश चलता तो दीपावली के त्यौहार को रमजान के सरीखा एक महीने लम्बा खींच देतीं मगर ये उसके नियंत्रण से बाहर की बात है आखिर उसका वश तो खुद के परिवार पर भी…

Three faces of society 

Hello guys hope you all are doing well  I am sorry I am too busy now days so both story series are getting late but today topic is different :-  Actually I always saw the different blogs about social issues also I anylize them today I would like to give my opinion which comes after a case study , I don’t know I am describing it in right manner or just throwing useless content . Now let’s start  First of…

अन्तिम दृश्य भाग-५

आप कृपया कमरा खाली कर दीजिए ,मुझे सफाई.करनी. है ” ये भावुक आवाज थी हास्पिटल के सफाई कर्मी की.,.उसने ये बात बहुत संकोचवश बोली थी मानो अन्दर से हृदय उसे ये करने के लिये मना कर रहा हो वो कहते हैं ना “गन्दा है मगर धंधा है “! सभी को बाहर निकलवाना मजबूरी है उसकी वरना अपनों को ऐसी स्थिति में एक पल भी दूर करने का दर्द उसे अच्छे से पता है ! खैर सुधीर बाहर टहलने चला गया…

Selfish or self care

(hello guys , how are you all? As you know I started my Hindi story but unfortunately I could not justice to story as per your reactions because when I started people have lot of views but after 2,3 part , you people just did  the favour to me by  your likes :)m sorry but I can’t stop my words so today again I am going to start a story so please give me a chance and pay your attention…

अन्तिम दृश्य – भाग -४ 

इस बार चित्रण थोड़ा आगे निकल चुका था। मानो जितने समय सुधीर व्यस्त हुआ उस वक्त का सारा अध्याय निकलकर आगे पहुंच गया हो… “भैया वो बात ये है कि मैं इस लडकी से शादी नहीं कर सकता!” – विनोद ने संकोचवश बड़ी धीमी आवाज में बड़े भाई से फुसफुसाते हुए कहा। इतना सुनते ही सुधीर के पैरों तले जमीन खिसक गयी आखिर बात ही ऐसी बोली थी। हुआ ये था कि सुधीर अब २३ वर्ष का हो गया था…

मतलबी 

मतलबी सी दुनिया है बातें मतलबी सी हैं ! बिल्कुल ऐसे जैसे  बातों में फरेब है  या फिर  फरेब की सी बातें हैं !! मैं भी मतलबी हूं यार तू भी मतलबी है यार, मतलबों की दोस्ती है  या मैं कहुं  दोस्ती में कोई मतलब है छिपा ! मतलबी हर कोई  इंसान है मतलबी सारा जहान है ,  मतलब के लिए रिश्ते हैं  या फिर  रिश्तों में भी मतलब मिला है पता नहीं ये खुद बने थे , या फिर…

My Confused Thoughts – Words 

Hello friends , how are you all ? Hope you all are doing well if not then hit me back . Now let’s come to the point , as you know i am confused by my thoughts so today again words are pulling me to write something on WordPress ,I really don’t know what will be that title but I am writing first . Today I opened YouTube and listened poetry . Some poetries were heart touching , some of…

अन्तिम दृश्य भाग-३

“ट्रिंग…. ट्रिंग…….” – इतने भीषण सन्नाटे को चीरते हुए फोन की रिंग ने पूरे कमरे में कोलाहल कर दिया। रात के १२ बजे थे, ये ध्वनि थी सुधीर के फोन की, जिसने पल भर में सुधीर को वर्षों के अतीत से निकालकर वर्तमान समय में एक छोटे कमरे में लाकर पटक दिया! सुधीर ने पहले इधर – उधर देखा, फिर बायें जेब में हाथ ड़ाला मगर फोन दायें जेब में था, फोन निकाला और कान से लगाया! “सॉरी भैया! मैं…

चुनावी मौसम

फिर से लगीं मुजलिसें वहॉं   पर  शमा भी हसीन हो चलीं हैं  वो वीरान सी पड़ी बस्ती में  अब रातों में भी रोशनी जलने लगी हैं  वर्षों से सूखे पड़े दीयों में  तेल जाने  अब  कौन दे रहा है? अब शामें भी खुशनसीब हो चली हैं ! वो पूछ रहा था हाल चाल उन सबसे  जिनके हिस्से की रोटी  वो कबकी डकार चुका है  पूछ रहा है घर के हालात उस गरीब से  जिसके हिस्से के पैसे वो कबसे…

Wings

Hello guys , I hope you all are doing well ,today I am going to publish my first English poem name as Wings and I dedicate my poem to all  who are daughters , sisters , friends and wife of anyone . I wish , I can fly  High in the sky  My dreams are fresh  But road map is dry . I wish I could  Go to the  high  way is toughest  But lemme try. Concrete on street  Darkness…