मेहनत लगती है कल्पनाओं को सच्चाई की तरह पेश करने में,

वरना दिल टूटने के बाद शायर तो लगभग सभी बन जाते हैं|

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चाहे आ जाये कितनी भी विपदा जंग में,
होगी बात नहीं कुछ विशेष क्योंकि
समर अभी है शेष|
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चुनौती और असफलता से मैं कब डरा हूँ,

मेरे हौसलों से रूह कुछ बेख़ौफ़ हो चुकी है|

 

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#ShubhankarThinks

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