भोग विलास का त्याग कर,
श्मशानों में तू रहता है और
अपनी धुन में मस्त मगन,
भांग रगड़ पी लेता है|
मैं भी ठहरा तेरा अखंड भक्त,
जो बस्ती में एकांत ढूंढ
अंतर्मन में रहता है,
संसार का मोह भुला के
जो खुद अपने में जी लेता है|