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लिबास 

Img credit- http://im.rediff.com/money/2013/nov/01india1.jpg ​तन ढ़कने के लिए या फिर लाज हया के लिए किसी कारीगर ने ये लिबास, शाम ढ़लते बाजारों में बनावटी चकाचौंध में दुकानों पर सजे हैं ढ़ेरों लिबास ! कुछ कौड़ियों में बिक रहे हैं  बड़े कीमती हैं कुछ लिबास, कुछ सूती, कुछ मख़मली तो कुछ रेशमी धागों से बने हैं ये सब लिबास ! खैर ये नहीं थी कोई बात खास| आज बात होगी नज़र – ऐ-जहाँ  की , इंसान के गुस्ताख़ आलम और बनावटी समां की…

शहरी गर्मी

​ये कविता उस स्थिति के बारे में लिखी गयी है| जब किसी नौकरी की तलाश में कोई बेरोजगार नौजवान युवा गांव से शहर का रुख करता है तो गर्मी में उसका हाल कुछ ऐसा हो जाता है- IMG credit- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:A_view_of_Road_Traffic_Chandagaur_to_New_Delhi_India_Highways.jpg गर्म मौसम और शहर का तापमान स्तर, यहां होता है माहौल औरों से इतर! लू के थपेड़ों से जलता बदन, काल के गाल में समा जाती है वो मदमस्त पवन ! वो सड़कों से उड़ती तेज  धूल , जैसे कोई चुभा…

ऑनर किलिंग!

​ऑनर किलिंग की घटनाएं हमारे देश में आये दिन होती रहती हैं, जिसके बाद के दृश्य को मैंने अपनी कविता के माध्यम से प्रदर्शित किया है| यह कविता लड़की के बाप के ऊपर आधारित है ,जिसमें लड़की का बाप अपनी बेटी सहित उस लड़के की हत्या कर देता है | आरोप सिद्ध होने के बाद उसे जेल होते है और घर वापस आकर कुछ इस तरह से व्यथित होता है – होती अगर जीवित वो आज, तो आँगन में मेरे…

हिंसक-अहिंसा

अभी जैसा आप सबको पता है देश में एक गंभीर समस्या चल रही है , उस समस्या का अभी तक कोई समाधान नही मिल पा रहा रोज हम अखबारों में सैनिकों के शहीद होने की खबर पढ़ते हैं ऐसी खबर पढ़कर मेरे अंदर बहुत उथल पुथल होती है समझ नहीं आ रहा आखिर ये रुकने का नाम क्यों नहीं ले रहा उसी व्यथा को मैंने कुछ शब्दों के माध्यम से लिखा है शायद कुछ लोगों को आपत्ति भी हो मेरे…

मेरे अंतर्मन का बेनाम नगर

​वो मेरे अंतर्मन के बेनाम नगर में  अमुक स्थान से निकलती संकरी राहों से गुजरने के बाद  एक आवास श्रेणी है ! वहां कोई अज्ञात लोगों का पूरा समूह छिपा है , हाँ!एक दो नहीं हैं ,उनका तो पूरा झुंड है पूरा का पूरा ! शान्ति से रहें तो भी ठीक है , मगर वो अशिष्ट जन कोलाहल करते हैं मैं ठहरा लाचार , निर्बल उनके सामने , आखिर अकेला प्राणी पूरे झुंड से कैसे लड़ाई करेगा! वैसे एक नहीं…

आत्मविश्वास 

बहुत बार जीवन में लगातार असफलताएं मिलती हैं और हम इतने हतोत्साहित हो जाते हैं कि समझ नहीं पाते आखिर अब करना क्या है ! नकारात्मकता हम पर हावी होने लगती है ऐसे में किसी की कोई बात समझ नहीं आती फिर भी हमारे पास खुद को उत्साहित करने का मौका होता है जिससे हम काफी हद तक नियंत्रण पा सकते हैं वो है आत्मविश्वास ! कुछ ऐसे ही उद्देश्य से मैंने ये कविता लिखी है इसलिए शीर्षक देखकर भ्रमित…

अंतिम दृश्य भाग -९

एक बड़ी सी कॉलोनी के बाहर लम्बा सा लोहे का जालीदार दरवाजा है और उसपे बैठे हुए दो बीमार से चौकीदार उनकी शायद शक्ल ही ऐसी है बेचारे सुबह से शाम तक गाड़ियों के नम्बर नोट करते हैं कभी कोई रुकता नहीं तो गाड़ी के पीछे उड़ती धुल भी खा लेते हैं ,क्या करें नौकरी है साहब महीने के अंत में दस हजार रूपये मिलेंगे तब जाकर घर के पांच सदस्यों के लिए रोटी का इंतजाम होता है ! खैर…

Selfishness

Truth is that you were right  Unknowingly  I blamed you  Actually I was selfish , Yes  Unluckily, overthinking was my mistake and  I was wrong   When I had alot expectation  And looked at you  Because I became so agressive . Focused , self dependent and  you are strong  And I pushed you  To become partner of crime  And now I am being offensive . I made mistakes , fault was mine  My poetic feelings were like unmelodious song  And I…

बोधकथा 3- तुलसीदास

नमस्कार दोस्तों , कैसे हैं आप सभी , जैसा की मैंने अपनी पहले एक पोस्ट में बताया था कि बोधकथा का क्रम प्रत्येक रविवार को ऐसे ही चलता रहेगा , बस तो आज के क्रम में मैं आपको एक छोटी सी कथा सुनाने जा रहा हूँ जो मैंने स्कूल के दिनों में सुनी थी – एक गांव में सामान्य सा लड़का था जिसका नाम था तीर्थंराम , पढ़ाई लिखाई में कोई ख़ास लगाव नहीं था तो घर वालों ने जल्दी…