Category: Thoughts

Independence Day Special: मानसिक गुलामी से आजादी कैसे पायें?

नमस्कार दोस्तों आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें| आजादी के पर्व के इस पावन मौके पर मानसिक गुलामी से आजादी के विषय में कुछ विचार आप सभी के समक्ष रखने जा रहा हूँ| आशा है आप समय देकर पढ़ेंगे| प्रस्तावना –                           15 अगस्त 1947 यह तिथि सभी को अच्छे से याद है क्योंकि इस दिन लगभग 800 वर्षों की गुलामी झेल रहे भारत को पूर्ण रूप से आजादी मिली थी| उस दिन से आज तक हम प्रतिवर्ष…

Thought of the day 8may

कई बार होता यह है कि हम क्रोध में आकर या फिर किसी बात को बिना जाने ही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं|जो कई बार आपकी लड़ाई करा देता है अथवा लोगों को आपके खिलाफ करा देता है। क्योंकि आपके द्वारा गुस्से में लिए हुए निर्णय की चपेट में कई बार वो लोग भी आ जाते हैं , जो अपनी जगह ठीक होते हैं। इसलिए कोई भी बात बोलने से पहले या फिर निर्णय लेने से पहले खुद की…

भारत का दंगानामा

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग, आशा है सभी अच्छे से अपने कार्य में व्यस्त हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं| काफी कुछ बातें मेरे दिमाग में चल रही हैं, इस पोस्ट में वो सभी बातें बताने की कोशिश करूंगा| अगर आपके पास थोड़ा समय खाली है तो ही पढ़ने की शुरुआत करें क्योंकि मुझे नहीं पता आज कितनी लम्बी बातें होंगी| अपनी स्वाभाविक भाषा के माध्यम से में शुरुआत करूंगा तो जरूरी नहीं यह कोई कविता होगी…

फ़िज़ा बिगड़ गयी है

दंगे फसादों का दामन नहीं छूट रहा, फ़िज़ाएँ बिगड़ गयी हैं मेरे देश में! तिरंगा फहराने पर भी मार काट होती है, शायद बहरूपिये रहने लगे हैं अब इंसानों के भेष में|

मैंने हकीकत देखी है

आज मैंने एक हक़ीक़त देखी, इंसान की गंदी सोच की हिमाकत देखी! कितने लोगों की नसीहत देखीं, नसीहत के पीछे सियासत देखी| ख़ुद चाहे दुनिया घूम आयें, बहन को घर में जकड़ने की हिमाकत देखी| मैंने झूठे लोगों को रोना रोते हुए, कुछ सच्चे लोगों की झूठी मुस्कुराहट देखी| कोई ख्वाब नहीं था वो, हक़ीक़त ही थी| हाँ मैंने कुछ कड़वी हक़ीक़त देखी|

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…