Category: Poetry

Composition

Please have patience for sometime, To hear my frictioning pen. Have look for sometime, To watch the ink painting again. Have patience for sometime, To understand the hidden intensions. Do me a favor, By admiring my dedication and penchants. Open your mind for sometime, To accept the reality of the composition. Please do prediction for sometime, To calculate my efforts to achieve my ambition. You’ll have to lose yourself in lyrics, To catch the flow of a composition. #ShubhankarThinks

वो लड़की 

वो लाड़ली है अपने माँ बाप की , मगर भाई की स्वतंत्रता के आगे , माँ- बाप की ममता उसके लिए फीकी पड़ जाती है! वो जिद्दी है बचपन से ही मगर पराये घर में वो दूसरों को मनाती है, उसे पसंद है, मनमानी करना मगर अब वो दूसरों के मन की बातों को निभाती है| उसकी आदत है, अपने निर्णय स्वयं लेने की मगर अब वो किसी दूसरों के आदेशों को सिर-माथे बिठाती है| कुछ गुण है उसमें औरों…

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार, ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार! निराशाओं से भ्रमित विचार, जैसे रुक गया हो ये संसार||   मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग , कर रहा अलग ही भागम भाग! गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की, दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|   ये परिणाम है सब असफलता का, सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का ! यह बात नहीं अब कोई विशेष है, समर अभी शेष है|   परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों…

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?

आज विजयादशमी के मौके पर , एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है! पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा, मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है| तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है! आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो, कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है| एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो, विचारों को एक और नया मोड़ दो! देखो राम ने सीता का त्याग किया…

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से, सेना हटती नहीं हमारी! अरि दल की  साजिशों से , गति रुकती नहीं हमारी! अवशेष ,संस्कृति से , दृष्टि हटती नहीं हमारी ! अपवाद बंदिशों से , छवि डिगती नहीं हमारी ! कुछ खास है हममें , की हस्ती मिटती नहीं हमारी ! सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा || आदर्श देख इसके  लोग सुदूर से आते हैं , विचार देख इसके, चकित रह जाते हैं! सत्कार देख यहां का, वो यहीं  बस जाते हैं !…

Surrender 

Good morning guys how are you all ,I hope you all are doing well, I am pleased to inform you that one of my poem has been featured on hubpages so please do read and give your honest feedback – https://hubpages.com/literature/surrender1 Thanks