Category: Poetry

वो लड़की 

वो लाड़ली है अपने माँ बाप की , मगर भाई की स्वतंत्रता के आगे , माँ- बाप की ममता उसके लिए फीकी पड़ जाती है! वो जिद्दी है बचपन से ही मगर पराये घर में वो दूसरों को मनाती है, उसे पसंद है, मनमानी करना मगर अब वो दूसरों के मन की बातों को निभाती है| उसकी आदत है, अपने निर्णय स्वयं लेने की मगर अब वो किसी दूसरों के आदेशों को सिर-माथे बिठाती है| कुछ गुण है उसमें औरों…

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार, ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार! निराशाओं से भ्रमित विचार, जैसे रुक गया हो ये संसार||   मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग , कर रहा अलग ही भागम भाग! गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की, दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|   ये परिणाम है सब असफलता का, सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का ! यह बात नहीं अब कोई विशेष है, समर अभी शेष है|   परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों…

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?

आज विजयादशमी के मौके पर , एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है! पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा, मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है| तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है! आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो, कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है| एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो, विचारों को एक और नया मोड़ दो! देखो राम ने सीता का त्याग किया…