Category: Poetry

बेमेल प्रेम

जंगल जंगल भटका करूँ , मेरा कोई भव्य निवास नहीं! भूत प्रेत के बीच रहा करूँ, यहाँ इंसानों का वास नहीं| तू महलों की राजकुमारी, तुझे कठिनाई का आभास नहीं| तूने शाही महल में आराम किया है, तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं| तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली, तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं| देख पार्वती तू बात माना कर, मेरे साथ विवाह की हठ ना कर| तू सुख सुविधा की है अधिकारी, मेरी हालत देख सब बोलें…

भारत का दंगानामा

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग, आशा है सभी अच्छे से अपने कार्य में व्यस्त हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं| काफी कुछ बातें मेरे दिमाग में चल रही हैं, इस पोस्ट में वो सभी बातें बताने की कोशिश करूंगा| अगर आपके पास थोड़ा समय खाली है तो ही पढ़ने की शुरुआत करें क्योंकि मुझे नहीं पता आज कितनी लम्बी बातें होंगी| अपनी स्वाभाविक भाषा के माध्यम से में शुरुआत करूंगा तो जरूरी नहीं यह कोई कविता होगी…

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…

भारत का अन्नदाता

सिहरते से आवेग कहीं ज्वालामुखी में लुप्त हो गए हैं, सरसराते से मनोविचार भूकंप के रौद्र रूप से भयभीत हो गए हैं! उफनते सी भावनाएँ, बाढ़ के प्रकोप में बह गयीं हैं, आकाश में आशा की किरण नहीं दिखी, माथे पर शिकन रह गयी है| धैर्य की कच्ची प्राचीर इस बार की बारिश में ढह गई है, प्रकृति रुष्ट है हमसे, शायद सत्कार में कुछ कमी रह गयी है| शासन प्रशासन को सुध बुध नहीं है, कृषि उनके लिए बस…

Composition

Please have patience for sometime, To hear my frictioning pen. Have look for sometime, To watch the ink painting again. Have patience for sometime, To understand the hidden intensions. Do me a favor, By admiring my dedication and penchants. Open your mind for sometime, To accept the reality of the composition. Please do prediction for sometime, To calculate my efforts to achieve my ambition. You’ll have to lose yourself in lyrics, To catch the flow of a composition. #ShubhankarThinks

वो बूढ़ी मॉं

  वो दानपात्र में लाखों चढ़ा आया मंदिर में जाकर, बस माँ के लिए सर्दी में जूते लाना शायद वो भूल गया था| वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया, बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया। वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया, बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया। कल तक जो…

आखिर कदम कौन उठायेगा

  मानवता की हदें भी करती, पौरुष की निंदा हैं! ए-नीच तेरे कुकृत्य से सभी पुरुष शर्मिंदा हैं| देख तेरी करतूतों को, हैवानियत की हदें भी करतीं, तेरी कठोर निंदा हैं! जाने कितने फूलों को तूने तोड़ा है, अब मासूम काली को भी नहीं छोड़ा है! तेरा हवस प्रेम देख, दरिंदगी भी तुझ पर कितनी शर्मिंदा है| हाय! तू कैसा दरिंदा है| चिता इन हवस के पुजारियों की जलानी होगी, आग इन व्यभिचारियों को लगानी होगी! कब तलक लुटती रहेंगी…

राजनीतिक इश्क़

मैं लाचार सा एक आशिक़ हूँ, हालत मेरी सरकार के भक्तों जैसी है ! अगर याद करूँ वो शुरुआती दिन , जैसे किसी चुनावी तैयारी में गुजर रहे थे, रात और दिन | तब तू रोज मुझसे मिलने आती थी , कसमें वादे रोज़ नए तू खाती थी ! अभी भी रखे हुए हैं , तेरे भेजे हुए सब प्रेमपत्र ! जैसे किसी राजनीतिक पार्टी का हो लुभावना घोषणापत्र| मैं भी भविष्य के सपने बुनता था रात-दिन , मानो मेरी…

घरौंदा

मेरे घर के आँगन में एक बड़ा सा पेड़ है बरगद का, जानवरों को धूप से बचाता है , हम सबको ठंडी छाँव देता है ! इन सबके साथ साथ वो आशियाना है उस नए प्राणी का|   जो अभी बसंत गुजर जाने के बाद यहाँ नई आकर बसी है, वो रहती है, उस बड़े से तने में बने ख़ुफ़िया से खोखले में, जो पिछले २-३ महीने से शैतान गिलहरियों की कारिस्तानी की वजह से बना था !   ये कोई…

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता – ख़बर ना तुझे रही अब , ना मुझे कोई ख़बर है! तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब हाल चाल मेरा, तो अपनी तरफ से बताना , मैं अब वाजिब नहीं समझता ! शायद दूरियां पसंद हैं तुझको, कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही…