Category: Hindi

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर , छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा ! ना होश है उन्हें अपनों का ,  ना रहा कोई तेरा मेरा | किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ? “क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?” मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले  “ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !” बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर…

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से, सेना हटती नहीं हमारी! अरि दल की  साजिशों से , गति रुकती नहीं हमारी! अवशेष ,संस्कृति से , दृष्टि हटती नहीं हमारी ! अपवाद बंदिशों से , छवि डिगती नहीं हमारी ! कुछ खास है हममें , की हस्ती मिटती नहीं हमारी ! सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा ||     आदर्श देख इसके  लोग सुदूर से आते हैं , विचार देख इसके, चकित रह जाते हैं! सत्कार देख यहां का, वो यहीं  बस जाते…

बातों को बातों में ही रहने दो !

​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है , तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं , और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान! तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो, मेरा क्या?मैं ठहरा हठी ! मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो ! वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं , अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो | हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में, प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा…

कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं , वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं ! बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है , अब देखो! मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए ! कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में , आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए | कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,…

मेरी माँ

जन्म वगरह का तो कुछ याद नहीं कुछ , आपने भी बाकी सबकी तरह मेरे लिए दर्द सहा होगा ! हाँ उन दिनों को याद करके, मुझे आज भी हंसी आती है! जब मुझे जबरदस्ती पकड़कर दाल पिलाई जाती थी | जो मुझे तब बिल्कुल पसंद नहीं थी | शब्द ज्ञान , मात्रा , लेख सब कुछ सिखाया था, अगर गलती करो तो डाँट भी लगाई जाती थी ! और जब मेरा दाखिला हुआ तो रोज शाम को स्कूल से…

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए – IMG source – http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg प्रेमी  अपनी प्रेमिका से – प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी! तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया…

अंतिम दृश्य (भाग -8 )

कुदरत भी क्या खूब खेलती है पहले खुद अंजान लोगों को एक दूसरे से मिला देती है , सारे मोह बंधन ,रिश्ते नाते बनाती है फिर एक क्षण में सब कुछ खत्म बाद में रह जाती हैं सिर्फ यादें और जब ऐसी यादें आती हैं तो साथ में अश्रु धारा अनायास ही निकल आती है ! शक्तिप्रसाद की स्थिति उस हंस के जैसी है जिसका जोड़ा अब टूट चुका है और हंसिनी के वापस आने की अब कोई उम्मीद बाकि…

अंतिम दृश्य   भाग-७

प्रतिदिन की भांति आज भी शक्तिप्रसाद सुबह भोर में उठकर नहा धोकर गांव के बाहर वाले शिव मंदिर पर पूजा करने गए थे , अब उन्हें ये कहाँ पता था आज होनी को कुछ और मंजूर है ,जैसे ही घर वापस आये हर रोज की भांति उन्हें लगा मधुमति चूल्हे पर चाय वगरह बना रही होगी मगर आज दृश्य पूर्णतयः परिवर्तित था , बाहर बरामद एकदम शान्त था और आज कोई बर्तन की आवाज भी नहीं आ रही थी !…

अंतिम दृश्य -६ 

दुःख और सुख दोनों एक दूसरे के संगी हैं , सुख आता है तो इसके पीछे पीछे दुःख भी चला आता है ! खैर बेटा बहु को शहर गये पूरा एक वर्ष व्यतीत हो गया है इस बीच दीपावली पर सभी लोग इकठठे हुए थे मधुमती का वश चलता तो दीपावली के त्यौहार को रमजान के सरीखा एक महीने लम्बा खींच देतीं मगर ये उसके नियंत्रण से बाहर की बात है आखिर उसका वश तो खुद के परिवार पर भी…

अन्तिम दृश्य भाग-५

आप कृपया कमरा खाली कर दीजिए ,मुझे सफाई.करनी. है ” ये भावुक आवाज थी हास्पिटल के सफाई कर्मी की.,.उसने ये बात बहुत संकोचवश बोली थी मानो अन्दर से हृदय उसे ये करने के लिये मना कर रहा हो वो कहते हैं ना “गन्दा है मगर धंधा है “! सभी को बाहर निकलवाना मजबूरी है उसकी वरना अपनों को ऐसी स्थिति में एक पल भी दूर करने का दर्द उसे अच्छे से पता है ! खैर सुधीर बाहर टहलने चला गया…