Category: Hindi

Motivational Quotes in Hindi

मेहनत लगती है कल्पनाओं को सच्चाई की तरह पेश करने में, वरना दिल टूटने के बाद शायर तो लगभग सभी बन जाते हैं| चाहे आ जाये कितनी भी विपदा जंग में, होगी बात नहीं कुछ विशेष क्योंकि समर अभी है शेष| चुनौती और असफलता से मैं कब डरा हूँ, मेरे हौसलों से रूह कुछ बेख़ौफ़ हो चुकी है|   #ShubhankarThinks Follow me on YourQuote

वो लड़की 

वो लाड़ली है अपने माँ बाप की , मगर भाई की स्वतंत्रता के आगे , माँ- बाप की ममता उसके लिए फीकी पड़ जाती है! वो जिद्दी है बचपन से ही मगर पराये घर में वो दूसरों को मनाती है, उसे पसंद है, मनमानी करना मगर अब वो दूसरों के मन की बातों को निभाती है| उसकी आदत है, अपने निर्णय स्वयं लेने की मगर अब वो किसी दूसरों के आदेशों को सिर-माथे बिठाती है| कुछ गुण है उसमें औरों…

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर मन की बात, Delhi Smog

नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग? आशा है सभी अच्छे से अपनी जिन्दगी में कुशल-मंगल होंगे, आज के ब्लॉग की अगर मैं बात करूँ आज विषय है दिल्ली के प्रदूषण का, जैसा की किसी भी ब्लॉग के पीछे उद्देश्य होता है, वैसा आज कुछ भी नहीं है, मैं शीर्षक सोचे बिना शुरू करने जा रहा हूँ| जैसा की आप सभी को पता होगा, २०१६ जैसा ग्रेट स्मोग देश की राजधानी दिल्ली में फिर से आ गया है, जिसका मुख्य कारण…

राजनीतिक इश्क़

मैं लाचार सा एक आशिक़ हूँ, हालत मेरी सरकार के भक्तों जैसी है ! अगर याद करूँ वो शुरुआती दिन , जैसे किसी चुनावी तैयारी में गुजर रहे थे, रात और दिन | तब तू रोज मुझसे मिलने आती थी , कसमें वादे रोज़ नए तू खाती थी ! अभी भी रखे हुए हैं , तेरे भेजे हुए सब प्रेमपत्र ! जैसे किसी राजनीतिक पार्टी का हो लुभावना घोषणापत्र| मैं भी भविष्य के सपने बुनता था रात-दिन , मानो मेरी…

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार, ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार! निराशाओं से भ्रमित विचार, जैसे रुक गया हो ये संसार||   मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग , कर रहा अलग ही भागम भाग! गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की, दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|   ये परिणाम है सब असफलता का, सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का ! यह बात नहीं अब कोई विशेष है, समर अभी शेष है|   परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों…

घरौंदा

मेरे घर के आँगन में एक बड़ा सा पेड़ है बरगद का, जानवरों को धूप से बचाता है , हम सबको ठंडी छाँव देता है ! इन सबके साथ साथ वो आशियाना है उस नए प्राणी का|   जो अभी बसंत गुजर जाने के बाद यहाँ नई आकर बसी है, वो रहती है, उस बड़े से तने में बने ख़ुफ़िया से खोखले में, जो पिछले २-३ महीने से शैतान गिलहरियों की कारिस्तानी की वजह से बना था !   ये कोई…

धनतेरस का महत्व,तिथि , पौराणिक कथाएँ

नमस्कार , कैसे हैं आप सभी लोग ? जैसा की आप सभी उत्सव की तैयारियों में व्यस्त होंगे , आप सभी को पता होगा दीवाली  अकेला उत्सव नहीं है! इसके साथ में ३-४ उत्सव और भी मनाए जाते हैं ,उन्हीं में से एक प्रारंभिक उत्सव है धनतेरस , जिसके बारे में मैं ये ब्लॉग लिखने जा रहा हूँ आशा है ,आपको कुछ नया जानने को मिले या फिर आपकी कुछ स्मृतियां ताज़ा हो जाएं तो शुरू करते हैं – प्रस्तावना…

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?

आज विजयादशमी के मौके पर , एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है! पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा, मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है| तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है! आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो, कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है| एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो, विचारों को एक और नया मोड़ दो! देखो राम ने सीता का त्याग किया…

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता – ख़बर ना तुझे रही अब , ना मुझे कोई ख़बर है! तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब हाल चाल मेरा, तो अपनी तरफ से बताना , मैं अब वाजिब नहीं समझता ! शायद दूरियां पसंद हैं तुझको, कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही…