Category: Hindi

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार, ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार! निराशाओं से भ्रमित विचार, जैसे रुक गया हो ये संसार||   मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग , कर रहा अलग ही भागम भाग! गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की, दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|   ये परिणाम है सब असफलता का, सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का ! यह बात नहीं अब कोई विशेष है, समर अभी शेष है|   परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों…

घरौंदा

मेरे घर के आँगन में एक बड़ा सा पेड़ है बरगद का, जानवरों को धूप से बचाता है , हम सबको ठंडी छाँव देता है ! इन सबके साथ साथ वो आशियाना है उस नए प्राणी का|   जो अभी बसंत गुजर जाने के बाद यहाँ नई आकर बसी है, वो रहती है, उस बड़े से तने में बने ख़ुफ़िया से खोखले में, जो पिछले २-३ महीने से शैतान गिलहरियों की कारिस्तानी की वजह से बना था !   ये कोई…

धनतेरस का महत्व,तिथि , पौराणिक कथाएँ

नमस्कार , कैसे हैं आप सभी लोग ? जैसा की आप सभी उत्सव की तैयारियों में व्यस्त होंगे , आप सभी को पता होगा दीवाली  अकेला उत्सव नहीं है! इसके साथ में ३-४ उत्सव और भी मनाए जाते हैं ,उन्हीं में से एक प्रारंभिक उत्सव है धनतेरस , जिसके बारे में मैं ये ब्लॉग लिखने जा रहा हूँ आशा है ,आपको कुछ नया जानने को मिले या फिर आपकी कुछ स्मृतियां ताज़ा हो जाएं तो शुरू करते हैं – प्रस्तावना…

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?

आज विजयादशमी के मौके पर , एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है! पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा, मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है| तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है, हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है! आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो, कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है| एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो, विचारों को एक और नया मोड़ दो! देखो राम ने सीता का त्याग किया…

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता – ख़बर ना तुझे रही अब , ना मुझे कोई ख़बर है! तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब हाल चाल मेरा, तो अपनी तरफ से बताना , मैं अब वाजिब नहीं समझता ! शायद दूरियां पसंद हैं तुझको, कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही…

चिंगारी उठी कोई ,जल उठा शहर मेरा!

​चिंगारी उठी कोई फिर , छिट पुट सी बातों में जलने लगा शहर मेरा ! ना होश है उन्हें अपनों का ,  ना रहा कोई तेरा मेरा | किसी ने बीच में जाकर सभी से प्रश्न ये पूछा ? “क्या यही सिखलाता है मजहब – धर्म तेरा ?” मचलकर लोग गुस्से में तुनक कर गुमान से बोले  “ये शुरुआत थी अभी तक कि , हम पूरा जहाँ जला देंगे !” बड़ा विचलित हुआ वो सुनकर फिर भयभीत से कठोर स्वर…

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !

​विस्फोटकों के डर से, सेना हटती नहीं हमारी! अरि दल की  साजिशों से , गति रुकती नहीं हमारी! अवशेष ,संस्कृति से , दृष्टि हटती नहीं हमारी ! अपवाद बंदिशों से , छवि डिगती नहीं हमारी ! कुछ खास है हममें , की हस्ती मिटती नहीं हमारी ! सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा || आदर्श देख इसके  लोग सुदूर से आते हैं , विचार देख इसके, चकित रह जाते हैं! सत्कार देख यहां का, वो यहीं  बस जाते हैं !…

बातों को बातों में ही रहने दो !

​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है , तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं , और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान! तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो, मेरा क्या?मैं ठहरा हठी ! मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो ! वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं , अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो | हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में, प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा…

कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं , वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं ! बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है , अब देखो! मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए ! कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में , आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए | कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,…