Category: Hindi

बेमेल प्रेम

जंगल जंगल भटका करूँ , मेरा कोई भव्य निवास नहीं! भूत प्रेत के बीच रहा करूँ, यहाँ इंसानों का वास नहीं| तू महलों की राजकुमारी, तुझे कठिनाई का आभास नहीं| तूने शाही महल में आराम किया है, तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं| तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली, तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं| देख पार्वती तू बात माना कर, मेरे साथ विवाह की हठ ना कर| तू सुख सुविधा की है अधिकारी, मेरी हालत देख सब बोलें…

भारत का दंगानामा

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग, आशा है सभी अच्छे से अपने कार्य में व्यस्त हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं| काफी कुछ बातें मेरे दिमाग में चल रही हैं, इस पोस्ट में वो सभी बातें बताने की कोशिश करूंगा| अगर आपके पास थोड़ा समय खाली है तो ही पढ़ने की शुरुआत करें क्योंकि मुझे नहीं पता आज कितनी लम्बी बातें होंगी| अपनी स्वाभाविक भाषा के माध्यम से में शुरुआत करूंगा तो जरूरी नहीं यह कोई कविता होगी…

फ़िज़ा बिगड़ गयी है

दंगे फसादों का दामन नहीं छूट रहा, फ़िज़ाएँ बिगड़ गयी हैं मेरे देश में! तिरंगा फहराने पर भी मार काट होती है, शायद बहरूपिये रहने लगे हैं अब इंसानों के भेष में|

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…

अकेले बढ़ोगे तो क्या बात होगी

राह में पैर फिसल गया तो क्या हुआ? अगर एक बार बिना सहारे के उठा तो क्या बात होगी| राह-ए- मंज़िल नहीं है आसान तो क्या हुआ? अगर एक बार आगे निकल गया तो फिर क्या बात होगी| रोड़े पड़े हैं राहों में तेरे तो क्या हुआ? गिर गिर के हर बार उठा तो फिर क्या बात होगी| हौसले टूटते हैं कठिनाइयों में तो क्या हुआ? अगर एक बार फिर से तूने हिम्मत जुटा ली तो क्या बात होगी| नाकाम…