Author: shubhankarthinks

मतलबी 

मतलबी सी दुनिया है बातें मतलबी सी हैं ! बिल्कुल ऐसे जैसे  बातों में फरेब है  या फिर  फरेब की सी बातें हैं !! मैं भी मतलबी हूं यार तू भी मतलबी है यार, मतलबों की दोस्ती है  या मैं कहुं  दोस्ती में कोई मतलब है छिपा ! मतलबी हर कोई  इंसान है मतलबी सारा जहान है ,  मतलब के लिए रिश्ते हैं  या फिर  रिश्तों में भी मतलब मिला है पता नहीं ये खुद बने थे , या फिर…

My Confused Thoughts – Words 

Hello friends , how are you all ? Hope you all are doing well if not then hit me back . Now let’s come to the point , as you know i am confused by my thoughts so today again words are pulling me to write something on WordPress ,I really don’t know what will be that title but I am writing first . Today I opened YouTube and listened poetry . Some poetries were heart touching , some of…

अन्तिम दृश्य भाग-३

“ट्रिंग…. ट्रिंग…….” – इतने भीषण सन्नाटे को चीरते हुए फोन की रिंग ने पूरे कमरे में कोलाहल कर दिया। रात के १२ बजे थे, ये ध्वनि थी सुधीर के फोन की, जिसने पल भर में सुधीर को वर्षों के अतीत से निकालकर वर्तमान समय में एक छोटे कमरे में लाकर पटक दिया! सुधीर ने पहले इधर – उधर देखा, फिर बायें जेब में हाथ ड़ाला मगर फोन दायें जेब में था, फोन निकाला और कान से लगाया! “सॉरी भैया! मैं…

चुनावी मौसम

फिर से लगीं मुजलिसें वहॉं   पर  शमा भी हसीन हो चलीं हैं  वो वीरान सी पड़ी बस्ती में  अब रातों में भी रोशनी जलने लगी हैं  वर्षों से सूखे पड़े दीयों में  तेल जाने  अब  कौन दे रहा है? अब शामें भी खुशनसीब हो चली हैं ! वो पूछ रहा था हाल चाल उन सबसे  जिनके हिस्से की रोटी  वो कबकी डकार चुका है  पूछ रहा है घर के हालात उस गरीब से  जिसके हिस्से के पैसे वो कबसे…

Wings

Hello guys , I hope you all are doing well ,today I am going to publish my first English poem name as Wings and I dedicate my poem to all  who are daughters , sisters , friends and wife of anyone . I wish , I can fly  High in the sky  My dreams are fresh  But road map is dry . I wish I could  Go to the  high  way is toughest  But lemme try. Concrete on street  Darkness…

अन्तिम दृश्य _ भाग-२

​चाचा आप सो गये क्या बैठे – बैठे? रात काफी है, अगर नींद आ रही है तो मैं आपको घर छोड़ आऊं? ” – पीछे से सुधीर बड़े धीमे स्वर में बोला। “नहीं – नहीं! मैं जाग रहा हूं” -एक साथ सकपकाकर कर जमुनादास उठे, जाग तो रहे थे मगर आंखें ऐसे खुली जैसे गहरी नींद से उठे हों!  फिर आंखें मलते हुए बोले – “तुम अकेले रह जाओगे यहां, गम की रातें बहुत लम्बी हो जाती हैं, बेटा! एक…

अन्तिम दृश्य  भाग-१

दृश्य – अस्पताल के एक छोटे  से कमरे में ४ बेड पड़े हुए हैं, उनमें से एक बेड पर शक्ति प्रसाद अचेत – सी अवस्था में जीवन और मृत्यु की लड़ाई बड़ी कठोरता से लड़ रहे हैं। उनके ठीक बगल में उनके छोटे भाई जमुना प्रसाद बहुत गंभीर मुद्रा में कुछ अतीत के साये में घिरे हुए , कुर्सी पर सतर्क बैठे हुए हैं ! कुछ पिछले वर्षों की यादें आज भी उनकी आखों में तार रही हैं। एक समय…

मानवता का पतन

​मानवता का पतन किसी ने बोला जान की कीमतें खूब घटी हैं बड़े अफसोस की बात है साहब  मेरे देश में जान से ज्यादा आबरू लुटी है मुझे  एक क्षण विश्वास नहीं होता था ऐसी बातों पर  मगर ऐसी घटनायें यहां खूब घटी हैं! एक रोज सुबह मुझसे कोई आकर बोला  मैंने झटपट अखबार खोला  मुंह लाल पड़ गया खबरें पढ़कर  फिर मन ही मन खूब बोला! मन में इतनी आग भरी थी अब वो घटना आंखों में हरी –…

रंग_ए_चमन -२

 खुदगर्जी का आलम फिर इस कदर छाया एक भाई ने दूसरे भाई का हिस्सा खाया अब खौफ फैल चुका था पूरे वतन में  अब जिन्दगानियों पर रहता था संगीन का साया! रंगएचमन की खुशबू कहीं काफूर हो गयी  इन्सानियत की तस्वीरें अब                   अपने ही घर पर चकनाचूर हो गयी  कौमें भी अपने अलग नशे में चूर हो गयीं रंगएचमन की खुशबू कहीं काफूर हो गयी  बाज के पांव अब सटीक लगे…