दुनिया भरी हुई है गधों से,
कुछ अच्छे गधे, कुछ बुरे गधे!
कुछ सच्चे गधे तो कुछ बेईमान।
कुछ घोड़े की शक्ल में, तो कुछ कम अक्ल हैं।
कुछ खच्चर बने हैं तो कुछ शेरों से तने हैं।
कुछ समझदार हैं गधे तो कुछ जाहिल गँवार गधे।
कुछ ज्यादा बोलते हैं तो कुछ बोलने से पहले तौलते हैं।
कुछ गधों का जमाने में खौफ है तो कुछ गधे बड़े डरकोप हैं।
कुछ गधे सबके काम बनाते हैं तो कुछ बस बोलने का खाते हैं।
गधे ये गधे ही हैं इनमें कोई खच्चर-घोड़ा नहीं,
इनके कंधों पर रखा हुआ वजन कोई थोड़ा नहीं।
फिर भी ये शेरों जैसी डींगें हाँक लेते हैं,
ख़ुद से फुर्सत नहीं फिर भी पड़ौस में झाँक लेते हैं।
गर गधे के अंदर कोई लोमड़ जाग जाता,
तो फिर इन्हें गधा नहीं इंसान कहा जाता।
खैर गधे हैं ये गधे ही तो कहे जाएंगे,
नाम रखने से शेर सिंह ये शेर नहीं बन जाएंगे।
ये दुनिया भरी हुई है गधों से,
कुछ अच्छे गधों से तो कुछ बुरे गधों से।

#ShubhankarThinks