आज मैंने एक हक़ीक़त देखी,
इंसान की गंदी सोच की हिमाकत देखी!
कितने लोगों की नसीहत देखीं,
नसीहत के पीछे सियासत देखी|
ख़ुद चाहे दुनिया घूम आयें,
बहन को घर में जकड़ने की हिमाकत देखी|
मैंने झूठे लोगों को रोना रोते हुए,
कुछ सच्चे लोगों की झूठी मुस्कुराहट देखी|
कोई ख्वाब नहीं था वो,
हक़ीक़त ही थी|
हाँ मैंने कुछ कड़वी हक़ीक़त देखी|