नमस्कार दोस्तों ,

कैसे हैं आप सभी , जैसा की मैंने अपनी पहले एक पोस्ट में बताया था कि बोधकथा का क्रम प्रत्येक रविवार को ऐसे ही चलता रहेगा , बस तो आज के क्रम में मैं आपको एक छोटी सी कथा सुनाने जा रहा हूँ जो मैंने स्कूल के दिनों में सुनी थी –


एक गांव में सामान्य सा लड़का था जिसका नाम था तीर्थंराम , पढ़ाई लिखाई में कोई ख़ास लगाव नहीं था तो घर वालों ने जल्दी ही उसकी शादी एक विदुषी कन्या से करा दी , जिसे पढ़ाई लिखाई का बहुत अच्छा अनुभव था क्योंकि उनके घर का माहौल वेद पुराण से गुंजित हुआ करता था मगर जब उन्होंने देखा की ससुराल में लोगों को इन सब कामो में दिलचस्पी नहीं है तो उन्हें बड़ा अजीब लगा मगर उन्होंने कभी घमंड नहीं किया कि मैं सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी हूँ इस घर में , तीर्थराम साधारण ग्रामीण था ,

अब नयी नयी शादी हुई थी वो भी रूपवती के साथ तो उसका ध्यान घर पर कुछ ज्यादा ही रहता था वो सारा दिन घर पर ही व्यतीत कर लेता था , पत्नी से इतना ज्यादा मोहित था कि एक पल भी उसे अपनी नजरों से दूर नहीं होने देता था , अब जैसा हम सबको पता है सावन के महीने में नयी ब्याहली बहु को मायके जाना होता है बस इसी तरह तीर्थराम की पत्नी भी मायके चली गयी , अब तो तीर्थराम को एक एक पल जैसे योजन के जैसे व्यतीत होते थे , एक एक दिन गिनता की कब सावन खत्म होगा !

अब आपको तो पता है प्रेम में व्याकुलता कुछ ज्यादा होती है , एक दिन व्याकुलता चरम पर थी अब शाम का समय था वर्षा घनघोर थी मगर तीर्थराम की जिद थी की आज कैसे भी मायके जाऊंगा और अपनी प्रिय पत्नी से मिलाप करके आऊंगा , घर वालों ने लाख समझाया परंतु वो जिद्द करके निकल पड़ा ! अब दिन छिप गया था वर्षा थमने का नाम नहीं ले रही थी और ससुराल जाने के लिए नदी पार करनी होती थी अब इतनी रात में कोई नाविक भी नहीं था तभी तीर्थराम ने देखा की कोई लकड़ी का बांस तैरता हुआ जा रहा है क्यों न इसी के सहारे नदी पार की जाये बस जैसे तैसे तीर्थराम ने उफनती हुई नदी पार की जब वो पार पहुंचे तो उन्हें ज्ञात हुआ वो बांस नहीं किसी की लाश थी जो तैरती हुई जा रही थी मगर वो प्रेम में अंधे हुए लाश को पकड़ कर इस पार आ गये , अभी भी उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ

दौड़ते हुए गांव में घुसे , ससुराल में घर के बाहर से देखा तो पहली मंजिल पर अट्टा पर एक कमरे में रौशनी थी ,उन्हें आभास हुआ ये जरूर उनकी पत्नी होगी रात में अध्ययन कर रही होगी बस उन्होंने आव देखा न ताव देखा ऊपर चढ़ने की युक्ति खोजने लगे तभी उन्हें रस्सी लटकी हुई दिखाई दी वो उसे ही पकड़ कर झट से ऊपर पहुंच गये और पत्नी को आवाज दी

तीर्थराम की आवाज सुनकर वो दौड़ती हुआ बाहर आई और तीर्थराम के हाथ में एक लंबा काला सर्प देख चिल्ला उठी दरअसल वो सांप को ही रस्सी समझ बैठे थे तो पत्नी ने झटक कर सांप को नीचे फेंक कर बोला , तुम्हे इतना पता नहीं चला की सांप है या रस्सी ?

तीर्थ राम मुस्कुराकर प्रेम पूर्ण तरीके से बोले “प्रिये तुम्हारे लिए मै इतनी घनघोर वर्षा का सामना करते हुए आया और तो और लाश को बांस समझ कर नदी पार कर डाली और सर्प को रस्सी समझ अट्टा पर चढ़ गया , ये सब मेरा प्रेम है तुम्हारे लिए मैं तुम्हारे बिना पल भर भी व्यतीत नहीं कर पा रहा था ?

ये सारे वचन सुनकर पत्नी को बड़ा अचंभा हुआ और वो तिरस्कार से बोली

“मुझे नहीं पता था आप इतने महान मुर्ख हैं

अरे मुर्ख !अगर इतना प्रेम तुमने राम से किया होता तो आज तुम कुछ और बन गए होते , पत्नी से प्रेम करने की जगह ज्ञान में समय बिताया होता तो प्रकांड ज्ञानी बन गए होते , तुम व्यर्थ हो इस पृथ्वी पर ”

ये सारे वचन क्रोध में पत्नी ने जब बोले तो तीर्थराम को बहुत ग्लानि महसूस हुई और उन्होंने बिना कुछ बोले वापस होना शुरू कर दिया , वर्षा इतनी घनघोर थी उसकी पत्नी को बुरे वचनों पर पछतावा हुआ उसने खूब माफ़ी मांगी मगर वो अब रुकने वाला नहीं था और निकल गया गांव से बाहर मगर वो इस बार अपने गांव वापस नहीं जा रहा था वो जा रहा था ज्ञान अर्जित करने उसने दो तीन वर्ष कठोर परिश्रम किया और संस्कृत , हिंदी जैसे विषयों में ख्याति अर्जित की और पूरे जगत में स्वामी गोस्वामी तुलसीदास के नाम से प्रसिद्ध हुए बाद में उन्होंने रामायण के हजारों श्लोकों को सरल हिंदी भाषा में अनुवादित कर दिया और वो आज भी रामचरित मानस के रूप में पूरे भारत में पढ़ी जाती है !


 शिक्षा – धन , संपत्ति , प्रेम , रिश्ते इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण शिक्षा भी होती है  क्योंकि किसी ने कहा है शिक्षा शेरनी के दूध की तरह होती है जो भी इसे पियेगा वो दूर तक दहड़ेगा ! समाज में , घर में हमारी इज्जत तभी होती है जब हमारे अंदर कोई गुण हो वरना अज्ञानी मनुष्य मुर्ख की श्रेणी में रखा जाता है !


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