​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है ,

तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं ,

और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान!
तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो,

मेरा क्या?मैं ठहरा हठी !

मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो !

वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं ,

अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो |

हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में,

प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा सकता !

हाँ! वो बात अलग है कि नायिका के लिए उपयुक्त पात्र तो तुम भी नहीं थीं!

मगर ये सब बातें हैं इन्हें बातों में रहने दो|

विशिष्ट सुरक्षा घेरे में घिरे तुम्हारे क़ैद मन मस्तिष्क का,

भला कैसे में गहन अध्ययन कर पाता ?

तुम्हें तो लगता है , जैसे मेरे पास कोई दिव्य शक्ति है विचारों को पढ़ने की !

अगर शक्ति होती तो मैं साधारण मनुज कहाँ कहलाता ?

खैर ये सब बातें हैं अब इन्हें बातें ही रहने दो |

तुम हो कोई प्रख्यात सुकुमारी जैसी,

तुम रहो आरामदायक , वातगामी अपने नये नये घरों में !

मैं हूँ युद्ध में सब कुछ हार चुके राजा के जैसा ,

मुझे पीड़ानाशक वनवास में सिर झुकाकर अकेले रहने दो !
स्वप्नों की आकांक्षाएं और प्रेम पिपासा!

 ये सब सिर्फ बातें थीं अब उन्हें बातों में ही रहने दो |

Pic credit- https://images.vice.com/vice/images/articles/meta/2015/04/08/i-was-assaulted-on-the-street-but-i-still-walk-home-alone-at-night-408-1428519902.jpg

शुभांकर 

© Confused Thoughts

आप सभी लोगों के अपार स्नेह और उत्साहवर्धन के चलते में व्यस्ततम दिनचर्या से थोड़ा समय लिखने के लिए निकाल पाया हूं ,आशा है आप अपने विचार जरूर देना चाहेंगे !

धन्यावाद!