एक प्रेमिका का प्रेमी  को    पत्र-

 

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एक प्रेमी युगल उच्च शिक्षा के लिए एक दूसरे से बिछड़ जाता है !

प्रेमिका ने पास के ही एक कॉलेज में BA  में दाखिला लिया है और प्रेमी को दूसरे शहर इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि पास के कॉलेज में B.Sc Mathmetics नहीं थी |अब दोनों को गए आधा वर्ष बीत गया इस बीच दोनों की ना कोई बात हुई ,ना कोई मिलाप हुआ !

आखिर होता भी कैसे उस जमाने में ना फोन होते थे ना ही यातायात इतना अच्छा था , होते थे तो सिर्फ पत्र !जिनसे लोग खूब सारे विचार एक बार में भेज देते थे फिर महीनों बाद पत्र का जवाब आता था और कभी कभी तो वो पत्र रास्ते में गुम हो जाता !

खैर मुद्दे पर आते हैं , हुआ ये की प्रेमी ने कोई पत्र नहीं लिखा वो पढ़ाई में इतना व्यस्त था और नए शहर में तालमेल बनाने में उसका सारा समय निकल जाता था ,अब ऐसे में प्रेमिका गुस्से में आकर एक पत्र भेजती है तो पढ़िए मैंने उस काल्पनिक पत्र को कविता के रूप में लिखा है !


प्रेमी मेरे ,ओ प्राण प्यारे!

तुम्हारी प्राण-प्यारी तुम्हें पुकारे,

छः मास बीत गए अब ,

प्रतीक्षा में नयन अश्रुमय हो गए हैं अब !

आओगे या नहीं भी आओगे,

कुविचारों से तन-मन भयभीत भये अब|

 

सांसारिक सुख सब बेस्वाद हो गए हैं ,

मेरे चहकते विचार अब अवसाद ग्रसित हुए हैं !

अब रौनकें नहीं हैं बगीचे में तुम बिन,

कोयल की मधुर ध्वनि भी कर्कश लगती है तुम बिन |

वो आम के पेड़ों पर बौर नहीं आयी इस बार !

शायद तुम्हारे जाने से नाराज हैं ,

या फिर ये हो ऋतुओं का प्रभाव !

 

अब सांयकाल में छत पर सन्नाटा रहता है ,

मैं गयी थी दो तीन दिन लगातार!

जब तुम मुझे वहां दूर वाली छत पर दिखाई नहीं देते ,

तो अब मैंने जाना ही बंद कर दिया |

विरह मेरे जीवन में कृष्ण पक्ष की काली अंधेरी रात की तरह छा गया है !

मेरी आँखों में तो जैसे किसी समुद्र का सैलाब आ गया है |

 

तुम बिसार दिए हो और प्रेम भी नहीं करते मुझे अब शायद!

पढ़ाई में इतने तल्लीन हुए हो ,

या फिर मेरी कोई सौतन मिल गयी है अब तुम्हें शायद|

तुम भूल गए वो सर्दियों के दिन !

जब बर्फ़ीली ठंडी हवाओं के बावजूद,

हम दोनों अपनी अपनी छत से एक दूसरे को इतनी दूर से निहारते थे!

तुम भूल गए वो पुराने दिन,

जब बाग से खट्टे आम चुराकर तुम मेरे लिए लाते थे |

ध्यान है ना !वो दिन जब तुम्हारे स्कूल की छुट्टी के इंतेजार में,

मैं पूरे एक घन्टे वहाँ चौराहे पर खड़ी रहती थी !

फिर हम दोनों साथ में पूरे रास्ते अपनी अपनी साईकल चलाते हुए बात करते – करते घर जाते थे |

 

 

मगर अब तुम्हें इन सब बातों की कोई चिंता नहीं है!

तभी आज तक चिट्ठी ना कोई संदेश आया ?

ना ये सोचा कि तुम बिन मेरी दशा कैसी है?

तुम्हारे मन में ना तनिक भी ये   ख्याल आया |

जरूर तुम्हें अब कुछ ना याद होगा ,

मुझसे तनिक भी प्रेम रहा ना होगा|



तो कैसे हैं आप लोग , जैसा कि आपको पता होगा मैं काफी समय से गायब हूँ और आगे भी कुछ समय तक व्यस्त रहूँगा ,आप सभी अपने विचार देना ना भूलें और इसका अगला भाग मैं schedule कर दूंगा और आप सभी आपके कमैंट्स का जवाब थोड़ा देर में दे पाउँगा !

धन्यवाद

शुभ रात्रि

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