आज वातावरण में मिठास सी है,
शीत पवन में भी तेरी सुगंध घुली है!


मेरे प्रेम की लहरें और भी तीव्र हो उठी हैं,
हिमपात की कठिन परिस्थिति में,
प्रत्येक शीत अनुभव मुझे,
तुम्हारे श्वांस से निकले उष्ण वायु के
सुखद अनुभव की याद दिलाता है|


तुम पता नहीं कहाँ हो?
लगातार ये शीत वायु मुझे स्पर्श करके,
तुम्हारे प्रेम की महत्ता का ज्ञान करा रही है|

winter

Pic Credit- Google

नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग, यह कविता मूल रूप से Bansi Joshi ने गुजराती में लिखी है, उसके बाद उनके बताये आंकड़ों के आधार पर मैंने इस कविता को हिंदी में पिरोया है| आप बंसी जोशी जी को यहां फॉलो कर सकते हैं|You can follow her on YourQuote too .

 

#ShubhankarThinks