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Introduction

Hello, Welcome to my new blog, I know this is not my first post still, as I noticed, Many fellow bloggers of mine didn’t recognize my new blog so  I would like to feature this post for introduction purpose – My name is Shubhankar Sharma(as my domain says), I am a software engineering student by profession, a web and an Android app developer by choice, a good reader, and a writer as well. I have been blogging on WordPress for…

वो बूढ़ी मॉं

  वो दानपात्र में लाखों चढ़ा आया मंदिर में जाकर, बस माँ के लिए सर्दी में जूते लाना शायद वो भूल गया था| वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया, बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया। वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया, बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया। कल तक जो…

Thought of the day 

कुछ अलग शौक पाल रखे हैं मैंने, नींदें काटकर सपने बुनता हूँ| पढ़ने गये कविता हम शेर-ओ-शायरी के दौर में, मेरी पंक्तियाँ कुचल गयीं, वाहवाही के शोर में| #ShubhankarThinks

Golden thought of life

वक्त बड़ी तेजी से चल रहा है, आपके पास दो विकल्प हैं , या तो ठहर कर जीवन का आनंद लो, या फिर वक्त की चाल में चाल मिला लो| अगर बीच का रास्ता चुना तो, ना काम बचा पाओगे, ना पहचान बना पाओगे|  

Mahadev

भोग विलास का त्याग कर, श्मशानों में तू रहता है और अपनी धुन में मस्त मगन, भांग रगड़ पी लेता है| मैं भी ठहरा तेरा अखंड भक्त, जो बस्ती में एकांत ढूंढ अंतर्मन में रहता है, संसार का मोह भुला के जो खुद अपने में जी लेता है|

Thought of the day

बेशक कितना भी नीचे गिरा ले ,मुझे ऐ तकदीर, लगातार मिली हार से हौसले और भी मजबूत हुए हैं| अब जितनी भी बार कोशिश करूंगा, पहले से कुछ ज्यादा ही उठूँगा|  

आखिर कदम कौन उठायेगा

  मानवता की हदें भी करती, पौरुष की निंदा हैं! ए-नीच तेरे कुकृत्य से सभी पुरुष शर्मिंदा हैं| देख तेरी करतूतों को, हैवानियत की हदें भी करतीं, तेरी कठोर निंदा हैं! जाने कितने फूलों को तूने तोड़ा है, अब मासूम काली को भी नहीं छोड़ा है! तेरा हवस प्रेम देख, दरिंदगी भी तुझ पर कितनी शर्मिंदा है| हाय! तू कैसा दरिंदा है| चिता इन हवस के पुजारियों की जलानी होगी, आग इन व्यभिचारियों को लगानी होगी! कब तलक लुटती रहेंगी…

#Shame Kolkata incident

कोलकाता में 4 साल की बच्ची के साथ घिनौनी हरकत करने वाले शिक्षक के लिए ये पंक्तियाँ मेरे जेहन से निकलती हैं! मानवता की हदें भी करतीं, पौरुष की अब निंदा हैं, ए-नीच तेरे कुकृत्य से सभी पुरुष शर्मिंदा हैं|    

प्रेम और हिमपात

आज वातावरण में मिठास सी है, शीत पवन में भी तेरी सुगंध घुली है! मेरे प्रेम की लहरें और भी तीव्र हो उठी हैं, हिमपात की कठिन परिस्थिति में, प्रत्येक शीत अनुभव मुझे, तुम्हारे श्वांस से निकले उष्ण वायु के सुखद अनुभव की याद दिलाता है| तुम पता नहीं कहाँ हो? लगातार ये शीत वायु मुझे स्पर्श करके, तुम्हारे प्रेम की महत्ता का ज्ञान करा रही है| Pic Credit- Google नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग, यह कविता मूल रूप…