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Introduction

Hello, Welcome to my new blog, I know this is not my first post still, as I noticed, Many fellow bloggers of mine didn’t recognize my new blog so  I would like to feature this post for introduction purpose – My name is Shubhankar Sharma(as my domain says), I am a software engineering student by profession, a web and an Android app developer by choice, a good reader, and a writer as well. I have been blogging on WordPress for…

बेमेल प्रेम

जंगल जंगल भटका करूँ , मेरा कोई भव्य निवास नहीं! भूत प्रेत के बीच रहा करूँ, यहाँ इंसानों का वास नहीं| तू महलों की राजकुमारी, तुझे कठिनाई का आभास नहीं| तूने शाही महल में आराम किया है, तुझे पहाड़ों के संकट ज्ञात नहीं| तू मखमल बिस्तर पर सोने वाली, तुझे जमीन पर सोने का अभ्यास नहीं| देख पार्वती तू बात माना कर, मेरे साथ विवाह की हठ ना कर| तू सुख सुविधा की है अधिकारी, मेरी हालत देख सब बोलें…

समाज का लेखकीकरण

वो कहते हैं ना, खुद को कितना भी रंगों में रंग लो, मगर एक दिन पानी पड़ते ही असली रंग दिख ही जाता है| कुछ दिनों से बयार सी चल पड़ी थी देश में शायर लेखकों की , फिर एक दिन आँधी आयी और सबके पत्ते खुल गये| कुछ दिनों से बयार सी चल पड़ी है, कविता ,कहानी लिखने और सुनाने की! इन सबके बीच बढ़ा है, लेखकों का धंधा! कोई नेम के चक्कर में फेमिनिज्म को बाहों में भर…

भारत का दंगानामा

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग, आशा है सभी अच्छे से अपने कार्य में व्यस्त हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं| काफी कुछ बातें मेरे दिमाग में चल रही हैं, इस पोस्ट में वो सभी बातें बताने की कोशिश करूंगा| अगर आपके पास थोड़ा समय खाली है तो ही पढ़ने की शुरुआत करें क्योंकि मुझे नहीं पता आज कितनी लम्बी बातें होंगी| अपनी स्वाभाविक भाषा के माध्यम से में शुरुआत करूंगा तो जरूरी नहीं यह कोई कविता होगी…

फ़िज़ा बिगड़ गयी है

दंगे फसादों का दामन नहीं छूट रहा, फ़िज़ाएँ बिगड़ गयी हैं मेरे देश में! तिरंगा फहराने पर भी मार काट होती है, शायद बहरूपिये रहने लगे हैं अब इंसानों के भेष में|

मैंने हकीकत देखी है

आज मैंने एक हक़ीक़त देखी, इंसान की गंदी सोच की हिमाकत देखी! कितने लोगों की नसीहत देखीं, नसीहत के पीछे सियासत देखी| ख़ुद चाहे दुनिया घूम आयें, बहन को घर में जकड़ने की हिमाकत देखी| मैंने झूठे लोगों को रोना रोते हुए, कुछ सच्चे लोगों की झूठी मुस्कुराहट देखी| कोई ख्वाब नहीं था वो, हक़ीक़त ही थी| हाँ मैंने कुछ कड़वी हक़ीक़त देखी|

उत्सव का आयोजन

​प्रभात में उमंग है, वायु भी स्वतंत्र है, आज उत्सव के आयोजन में वातावरण स्वच्छंद है। चारों दिशाएं गुंजाल हैं, प्रकृति का भी संग है। सागर की प्रसन्नता तो देखो, कितनी विशाल तरंग है! गगन भी है झूमता आज श्वेत स्वच्छ रंग है। केसरी – से रंग में प्रकाश की किरण लिये सूर्यदेव उदय हुए  अंधकार का हरण किये। वो देखो वन्य जीव को उत्सव के आयोजन में रत हर एक सजीव को मधुर – मधुर ध्वनि से पूर्ण आयोजकों…