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Introduction

Hello, Welcome to my new blog, I know this is not my first post still, as I noticed, Many fellow bloggers of mine didn’t recognize my new blog so  I would like to feature this post for introduction purpose – My name is Shubhankar Sharma(as my domain says), I am a software engineering student by profession, a web and an Android app developer by choice, a good reader, and a writer as well. I have been blogging on WordPress for…

अकेले बढ़ोगे तो क्या बात होगी

राह में पैर फिसल गया तो क्या हुआ? अगर एक बार बिना सहारे के उठा तो क्या बात होगी| राह-ए- मंज़िल नहीं है आसान तो क्या हुआ? अगर एक बार आगे निकल गया तो फिर क्या बात होगी| रोड़े पड़े हैं राहों में तेरे तो क्या हुआ? गिर गिर के हर बार उठा तो फिर क्या बात होगी| हौसले टूटते हैं कठिनाइयों में तो क्या हुआ? अगर एक बार फिर से तूने हिम्मत जुटा ली तो क्या बात होगी| नाकाम…

Thought of the day 13jan

 नयी बुनियाद में जरूरत थी थोड़ी  पानी की तराई की, साजिशन यह काम एक फ़रेबी कारीगर ने लिया! फिर रोज़ पानी की अतिशयोक्ति की गयी, और ढहा दी गयी वो कच्ची नींव  पर टिकी बुलंद दीवार|

Thought of the day 12Jan

 निकले थे हम भी अकेले ही राहों में, जुनून जोश लिए मन में| फिर कभी उसूलों की रुकावट हुई तो  कहीं तज़ुर्बे ने कुछ राहों पर आगे बढ़ने से रोका| अब देख लो खुद को जमाने की रफ्तार में  खुद को थोड़ा पीछे पाता हूँ|

एक पत्र : – प्यारे पापा 

यह कविता सत्य घटना पर पूर्णतयः आधारित है, जिसमें मैंने ऐसे गंभीर मुद्दे के साथ न्याय करने का एक छोटा सा प्रयास किया है, इसीलिए आपसे निवेदन है की जरूर पढ़ें | प्यारे पापा , मैं आपकी लाड़ली बेटी, जिसकी फ़िज़ूल की बातें आप बड़े चाव से सुना करते थे, मगर अब तो काम की बातें सुनने के लिए भी आपके कान इजाजत नहीं देते शायद!   खैर ,मैं यह पत्र तंज कसने के लिए नहीं लिख रही, किसी को नीचा दिखाने के…

भारत का अन्नदाता

सिहरते से आवेग कहीं ज्वालामुखी में लुप्त हो गए हैं, सरसराते से मनोविचार भूकंप के रौद्र रूप से भयभीत हो गए हैं! उफनते सी भावनाएँ, बाढ़ के प्रकोप में बह गयीं हैं, आकाश में आशा की किरण नहीं दिखी, माथे पर शिकन रह गयी है| धैर्य की कच्ची प्राचीर इस बार की बारिश में ढह गई है, प्रकृति रुष्ट है हमसे, शायद सत्कार में कुछ कमी रह गयी है| शासन प्रशासन को सुध बुध नहीं है, कृषि उनके लिए बस…

Thought of the day

सब्जी में थोड़ा मक्खन मिला देने से  उसका स्वाद वर्धित हो जाता है, वहीं मक्खन अधिक मात्रा में हो  जाये तो स्वाद बिगाड़ देता है| यह बात लगभग सभी बातों पर उचित ही बैठेगी| #ShubhankarThinks